Saturday, May 24, 2014

समझाईश

किस कदर बेहाल है आजकल मेरे दोस्त मुझसे ए गुलबदन 
जब से बना शौक तेरे दीदार का सारे शौक  जैसे मर गए

आजा चलते हैं कहीं दूर किसी राह पे जहाँ खुशियाँ मिले
जितने देने वाले थे ख़ुशी हमको अब वो बात से मुकर गए

आये थे मुझे समझाने समझदार लोग जहाँ भर के 
सब आये समझाया और हँसते हँसते अपने घर गए

इश्क के मोहल्लों में रोशनी कम होती है आजकल
जो काम सयाने नहीं कर पाए वो दीवाने कर गए

गफलत में जीने वाले जी कर भी मुर्दा रहते हैं जहाँ में

जिंदादिली से जीने वाले ज़माने को जिंदाबाद कर गए

1 comment:

anuj sharma fateh said...

गफलत में जीने वाले जी कर भी मुर्दा रहते हैं
जिंदादिली से जीने वाले ज़माने को जिंदाबाद कर गए

nice lines......all the best