तेरे साथ से भी
ज्यादा तेरी जुदाई तेरी है सनम
मुझे एक पल के
लिए भी कहीं और जाने नहीं देती
मैं लाख छुपाना
चाहता हूँ मोहोब्बत को तेरी जमाने से
तेरे ख़याल से ही
आई चेहरे पे हंसी छुपाने नहीं देती
पाता तो आया हूँ
मैं दुनियां के सब तमाशों को बेख्वाहिश यूँ ही
आज एक ख्वाहिश की
है तो ये दुनिया उसे मुझे पाने नहीं देती
आओगे फिर
शहर-ए-खामोशा में जब लहद में मिल जाउंगा मैं
जीते जी ये तमाशबीन दुनियां तुझे मेरे पास आने नहीं देती
प्यार को जी के
भी गीत गम के गाता है हर घडी "बादल"
दिलख़ुशी में भी
गीत ख़ुशी के मोहोब्बत गाने नहीं देती
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