Saturday, May 3, 2014

तारीफ

तारीफ तेरी लिखनी है मुझको कहो क्या क्या लिखूं
हंसी लिखूं ,ख़ुशी लिखूं ,या फिर मेरी जान लिखूं ?

यूँ तुम मेरा लेखन हो मैं खुल के तुझे सर-ए-शाम  लिखूं
भाषा भले न आती हो पर मैं तुझे दिल की जुबान लिखूं?

यूँ तुम एक चित्र हो सुनहरा बन बन के मैं चित्रकार लिखूं
खिलती  सुबह ,उजली दुपहर या फिर महकती शाम लिखूं?

यूँ तुम जीवित साहित्य हो, कहो क्या बन फनकार  लिखूं
काव्य,कविता,शे'र ,गजल तुम ,तुमको बन कलाकार लिखूं?

यूँ तुम गुलों की बगिया हो ,क्या बन कर के बागबान लिखूं
रातों में महकती बेल लिखूं या सहरा में खिला गुलाब लिखूं ?

यूँ तुम बहती नदिया हो ,क्या मैं बन के तेरी धार लिखूं
चलती लहर,चुपचाप झील या, सावन की फुहार लिखूं ?

कहो सनम क्या लिखूं तुझे मैं, क्या जीवन का सार लिखूं
चैन-सुकुं,अरमान,आरज़ू,या दिल में उमड़ता प्यार लिखूं ?

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@kki









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