जिस मोड़ पे आये हैं उस मोड़ से जातेहै, कुछ सुस्त कदम रस्तेकुछ तेज कदम राहेपत्थर की हवेली को, शीशे के घरोंदो में, तिनको के नशेमन तकइस मोड़ से जाते है...आंधी की तरहउड़कर, एक राह गुजरती हैशरमाती हुयी कोई,क़दमों से उतरती हैइन रेशमी राहो में, एक राह तो वो होगीतुम तक जो पहुचती हैइस मोड़ से जाते है..एक दूर से आती है,पास आके पलटती हैएक राह अकेली सी,रुकती हैं ना चलती हैये सोच के बैठी हूँ, एक राह तो वो होगीतुम तक जो पहुचती हैइस मोड़ से जाते है.. ..!!*****
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