Thursday, May 1, 2014

नाफरमान दिल

आज घबराया दिल अमलन को देख कर
चैन से कोई यहाँ मुराद भी नहीं कर सकता  ?

ये अब्ना है दिलों की कोई तिजारत नहीं है
अबस क्या कोई यहाँ इश्क भी नहीं कर सकता ?

जिसके आने से दिल को सुकून आता है गोया
क्या यहाँ कोई ये इकरार भी नहीं कर सकता ?

क्यूँ ये इज्तिऱाब-ए-उफ्ताद रहता है मेरे दिल में
क्या आशिक इश्क पे एतबार भी नहीं कर सकता ?

लगे आवाज-ए-इब्तिसाम किसी की अजान सी
क्या नफ्स यहाँ कोई नमाज भी नहीं कर सकता ?

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*अमलन - यथार्थ
*अब्ना - संधि
*तिजारत - व्यापार
*अबस -लाभहीन
* इज्तिऱाब-ए-उफ्ताद - दुर्घटना की आशंका
*आवाज-ए-इब्तिसाम - हंसी की आवाज











1 comment:

anuj sharma fateh said...

अच्छा लिखते हैं जारी रखिये .....