अरज
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जिस तरह तेरी
मेरी मुलाकात बीत जाए
तेरे बिना आई ये
खामोश रात बीत जाए
फिर चाहे कुछ और
बीते या न बीते माही
मेरी तन्हाई तेरी
तन्हाई के साथ बीत जाए !!
आभास
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थी अगर मुमकिन
कहानी बिन तेरे मेरे जहाँ
फिर कौनसे किरदार
का पैगाम तू लाइ यहाँ
है कहाँ वश में
हमारी रूह का किरदार देख
जिंदगानी मोड़ कर
लाइ हमें देखो कहाँ !!
जिन्दादिली
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दफ़न होने को थे
जो अरमान दिलों में थे पले
लौटी फिर वो ताल
जो कदम हमारे साथ चले
निरस हो चुके
जीवन में ये देख कहीं हैं फूल खिले
चल चल चलें ,उस राह पे जिस राह पे मंजिल मिले !!
हकीक़त
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इस अजब जगत की
गजब रीत ये खुद ही सब कुछ बुनता है
कहनी -सुननी तो
सबकी यूँ ,राही खुद अपनी राहें
चुनता है
मत सोच अंत क्या
होगा इसका जिसकी हुई शुरुआत नई
एक गहरे जिन्दा
इंसा की बात ये पागल सुनता है ...!!
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