Thursday, April 24, 2014

हाल-ए-दिल (एक ख़याल,एक सवाल )

आज सुबह जब आँख खुली मेरी
वो ही रात का ख़याल दिल में पाया

जिस उम्मीद में रात को सोया था
उसे सुबह ५ बजे ही पूरा हुआ पाया

इसके मायने तलाशता मैं उठा
बालकनी में जाकर खड़ा हुआ

मोगरे पे नया फूल खिला था
कल का फूल वहीँ था पड़ा हुआ

मैंने उसे देखा और वो मुस्कुराया
मेरे दोस्त पैगाम ये तू ये कैसा लाया

अजब बेचैनी सी हुई दिल में फिर से
सही है या गलत समझ नहीं आया ?

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