Tuesday, April 29, 2014

तुम्हारे अहसास ने मुझे सूफी कर दिया ...

तुमसे पहले न थी आज सुबह की राह कोई
बस थी तो उस खामोश रात की आह कोई

तुझे सामने देख मैं तो मानो निशब्द हो गया
तुझे आगोश में लेना मेरा हसीं प्रारब्ध हो गया

अलग हो के लगा के जा रही है जान मेरी
तेरी हंसी की आवाज बन गयी अजान मेरी

ज़िन्दगी को ज़िंदा किया तू एक ऐसी आदत है
इश्क कहूँ या कहूँ आरज़ू तू अब मेरी इबादत है

जामिन इश्क की बन के आई अलसुबह तू जाहिर
बस क्या कहूँ कैसा लगा के देख लिया कोई साहिर

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*जामिन - भरोसा दिलाने वाला
*जाहिर - प्रत्यक्ष
*साहिर - जादू




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