बाड खेत को खाय रही यूँ किरकेट के खेल में
पकडो इनको मारो डंडा डालो सबको जेल में
जनता अपनी खुशी मनाये क्या मारा है गेल ने
देखो कैसे मत मारी है इस भद्र जनो के खेल ने
पैसे का ये खेल या कह लो एक अजब मायाजाल है
आत्म हनन करके जो खेले वो मोहरा मालामाल है
कोई धर्म की संज्ञा देता कोई कहे भगवान है
आड धरम की लेकर खेले ये कैसे शैतान है
कुछ भी कह दूँ अपने छंदों में फर्क इन्हें क्या पड़ता है
पापों का भुगतान यहीं पर हर किसी को करना पड़ता है
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