राजनीती को ले चलो अब गाँव के गलीयारों में
मिट रहा है लोकतंत्र अब संसद की दीवारों में
निति इसमें बची नहीं बचा है तो सिर्फ राज
दिल्ली में बैठे देख हैं राजा सारे काम काज
नेता जनम लेते हैं आजकल नेता की कोख से
जनता भी इन्हें चुन लेती है नएपन के शौक से
महलों में बैठ के राजा ठाठ से देते हैं यूँ फरमान
संसद हमारा मंदिर है और हम हैं इनके श्रीभगवान
बहुत हुई इनकी इज्ज़त बहुत हुआ इनका ये सम्मान
हर गाँव करे खुद को रोशन ,हर शख्स करे भारत निर्माण
मिट रहा है लोकतंत्र अब संसद की दीवारों में
निति इसमें बची नहीं बचा है तो सिर्फ राज
दिल्ली में बैठे देख हैं राजा सारे काम काज
नेता जनम लेते हैं आजकल नेता की कोख से
जनता भी इन्हें चुन लेती है नएपन के शौक से
महलों में बैठ के राजा ठाठ से देते हैं यूँ फरमान
संसद हमारा मंदिर है और हम हैं इनके श्रीभगवान
बहुत हुई इनकी इज्ज़त बहुत हुआ इनका ये सम्मान
हर गाँव करे खुद को रोशन ,हर शख्स करे भारत निर्माण
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