Wednesday, July 2, 2014

मैं और एक खामोश प्रेम कहानी ...


कल पुरे दिन की बारीश के बाद
आज सुबह जब थोडा धूप खिली
बारीश से खिले मोगरे के बदन पर
आकर बैठ गयी एक नाजुक तितली

उसके रंगीन पंखो के नर्म अहसास से
मोगरा मानो आनंद में महक सा गया
ठंडी शीतल हवा के झोंके से हिलता सा
तितली का मन उस महक में बहक सा गया

ये उनकी पहली मुलाकात थी यूँ तो शायद 
मोगरा मंत्रमुग्ध सा उसे निहारे जा रहा था
तितली के नर्म पंखो के हिलने से आने वाली
मादक हवा से पत्तियों को झारे जा रहा था

तितली ने मोगरे से पंख हिलाकर पुछा यूँ
क्या तुम्हें मुझसे प्यार हो गया है ?
मोगरा मुस्कुराया,अपने आप में शरमाया
उसे लगा उसके प्यार का इजहार हो गया है

मोगरे की मुस्कराहट पे ही वो मस्तानी  
उसके दिल को इतना बखूबी जान गयी
बिना कुछ कहे मोगरे की आँखों के प्रेम को
अपने पंखों से छूकर पहचान गयी

प्रेम-प्यासी तो तितली भी थी शायद, हाँ
एक बंधन का ख़याल उसे रोक रहा था
दोनों का प्यार और जरूरतें तो थी मगर
मर्यादा का उल्लंघन उसे टोक रहा था

जब तितली खामोश हो कर बैठ गयी
तब मोगरे ने भी उस अंतर्द्वंद को भांपा
अपनी बड़ी पत्तियों को समेटकर उसने
तितली के नाजुक बदन को खुद में ढांपा

सारी मर्यादाओं के बोझ से दबे हुए से
तितली के मन को प्रेम से साध लिया
तितली ने भी अपने कोमल पंखों को
मोगरे के प्रेमानुग्रह में  बाँध लिया

अपने अपने जीवन की रिक्तताओं को
दूर करने के लिए वो दोनों मिल गए
इस अलौकिक प्रेम में दोनों के बदन
एकदूसरे की खुशबु से मानो खिल गए

मोगरे की जरुरत कोई तितली नहीं है
उसको भाता तितली का अनुराग है
तितली की जरुरत कोई मोगरा नहीं है
उसे रिझाता मोगरे का प्रेम-पराग है

साधारण से शब्दों में लिखी हुई
ठंडी सुबह में दिल की जुबानी
एक पेड़ और और एक पतंगे की ये 
ताज़गी भरी खामोश प्रेम कहानी
अपनी ज़िन्दगी को समर्पित...!!

@kki
...








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