बहुत
दिन हुए गाँव की कोई खबर नही आई
बालकनी
में चूं चूं करती चिड़िया नही आई..!
सोसायटी
में दशहरे पे रावण जलाया बच्चों ने
रामलीला
के मंच से आह की आवाज़ नही आई..।
कल
शाम जब देखा शरद पूनम के चाँद को
सुबह
इंतजार किया पर ठंडी खीर नही आई..।
दरवाज़े
लगे घर होते होंगे साफ रोज ही शायद
दिवाली
लौटी मोहल्ले में झाड़ू की आवाज़ नही आई..।
कोशिश
करली हर तरह से त्योंहार मनाने की
दिल
मे गम चेहरे पे खुशी वाली शहरी ताशीर नही आई ..।
2 comments:
वाह !
क्या बात हैं भाई, बहुत खूब |
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