Thursday, November 7, 2013

ज़िन्दगी लाइव...जारी है


कल रात की तेज़ हवा बारिश
बारिश से छिपते बचते लोहार

बारिश में बहा पटाखी कचरा
शान्ति से बीत चूका त्योंहार

गाँव की एक ठंडी सुबह
खेतों को जाते किसान

मंदिर में बजती घंटियां
मस्जिद से आती अजान

दरवाजे पे पड़ा अखबार
प्याले में पड़ी गरम चाय

छुट्टी के बाद खुलते स्कूल
अध्यापको की चुनावी राय

माँ ने बुहार दिया अल सुबह
बिखरा था आंवले का पत्ता


आँगन में कुर्सी पे बैठा मैं
दिल से निकली कविता

---जिंदगी जारी है

6 comments:

anuj sharma fateh said...

दरवाजे पे पड़ा अखबार
प्याले में पड़ी गरम चाय

छुट्टी के बाद खुलते स्कूल
अध्यापको की चुनावी राय

सहज मना के सहज शब्दो का आकर्षक विन्यास लुभवना है। छः माह हुए लगभग आपसे परिचय हुए पहली बार आपका ब्लॉग जानने देखने का अवसर पहली बार मिला समझ नहीं पा रहा धन्यवाद दूं या शिकायत करूं खैर अब आपके द्वारा ही बताये जाने से सुखद लगा अपेक्षा है आगे भी आप याद रख पाएँगें......:-)

Paurush said...

वाकई उम्दा सुबह का भावनात्मक चित्रण ! Keep it up...

Akhil_Raj said...

अरे मैं थोडा शर्मीला इंसान हूँ मुझे लगता नहीं के मैं ऐसा कुछ लिखता हूँ जो आपसे शेयर कर सकू इस बार हिम्मत कर के शेयर किया..:P @anujsharma होंसला अफजाई के लिए शुक्रिया @paurush k

Akhil_Raj said...

अरे मैं थोडा शर्मीला इंसान हूँ मुझे लगता नहीं के मैं ऐसा कुछ लिखता हूँ जो आपसे शेयर कर सकू इस बार हिम्मत कर के शेयर किया..:P @anujsharma होंसला अफजाई के लिए शुक्रिया @paurush k

Rahul Pandey's Blog said...

बहुत सुन्दर…मेरे विचार से कविता का तात्पर्य है भाव… और आपकी कविता में भाव बहुत ही सुन्दर तरीके से झलकते हैं.… लिखते रहिये और बांटते रहिये

Akhil_Raj said...

Rahul Pandey जी बस सहज ही लिखना पसंद है अच्छा लगा ये जानकार की आपको पसंद आया